Monday, December 21, 2009
डाक्टर कविता किरण की रचना , केयर टू केयर की प्रमुख डाक्टर मोना कपूर का जीवन , डाक्टर जयप्रकाश गुप्त का हिंदी समीक्षा आलेख ,केशव जांगिड की कहानी विपिन चोधरी का नारी की पीढ़ा पर आलेख , मंजरी जोशी से एक मुलाकात ,भारतीय मीडिया पर विनोद विप्लव का व्यंग्य , और प्रभाष जोशी ,तसलीमा नसरीन की रचनाये .....
अंक जो आपको सोचने पर विवश कर दे ॥
प्रति मंगवाए या सदस्यता ले ॥ मूल्य मात्र ..१० /-
वार्षिक - १०० /- मात्र
फ़ोन - ०९२१०५००१६३ ( दिल्ली )
मेल - मनोरंजन कलश @ जीमेल .कॉम
मनोरंजन कलश ,जनवरी (नवचेतना विशेषांक )

डाक्टर कविता किरण की रचना , केयर टू केयर की प्रमुख डाक्टर मोना कपूर का जीवन , डाक्टर जयप्रकाश गुप्त का हिंदी समीक्षा आलेख ,केशव जांगिड की कहानी विपिन चोधरी का नारी की पीढ़ा पर आलेख , मंजरी जोशी से एक मुलाकात ,भारतीय मीडिया पर विनोद विप्लव का व्यंग्य , और प्रभाष जोशी ,तसलीमा नसरीन की रचनाये .....
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वार्षिक - १०० /- मात्र
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Sunday, December 20, 2009
कविता - मेरा बसंत
मुस्कुराती कलियों के मेलो में ,
मकरंदित पुष्पों के झूलो में ,
भ्रमर से तितली के अनुबंधों में ,
प्रीत - स्नेह के नवबंधो में ,
आ रहा है मेरा बसंत।
मुस्कुराती कलियों के मेलो में ,
मकरंदित पुष्पों के झूलो में ,भ्रमर से तितली के अनुबंधों में ,
प्रीत - स्नेह के नवबंधो में ,
आ रहा है मेरा बसंत।
फाल्गुनी हवा की बयार में ,
दहकते पलाश की बोछार में ,
धरा से गगन के कटबंधो में ,
सोंधी अमलताश की सुगंधों में ,
गुनगुना रहा है मेरा बसंत ।
गुलमोहर की मधुकर डालो में ,
उन्मुक्त , उन्मादक विलासों में ,
नवगीतों ,बधाई भरे उल्लासो में ,
महक रहा है मेरा बसंत ।
उन्मुक्त , उन्मादक विलासों में ,
नवगीतों ,बधाई भरे उल्लासो में ,
महक रहा है मेरा बसंत ।
Monday, November 23, 2009
अनमोल रिश्ता

पिता संतति का सम्बन्ध है जो ,
पानी - पेड़ में अनुबंध है वो ।
जनक - संतान में सम्बन्ध है जो ,
पालक - आश्रयी का करबंध है वो ।
जीवन उत्पत्ति की करताल है ,
सयमेव झंकृत ताल है ।
आदर और स्नेह का मध्यस्थ है,
अन्य संबंधो से तटस्थ है ।
वो तो है भवजीवन के आरम्भ
का शंखनाद ,
पोषक और पिपासु के
मध्य का अनुनाद ।
संगीत और संगति के
मध्य की लय है ,
आशा और अनुरोध
का विलय है
- केशव जांगिड (कवि और लेखक )
(बालसाहित्य बाल क्लब से पुरुस्कृत - २००८)
माँ की वेदना

डगमगाती बेटी जब गिर जाती है ,
माँ डर जाती है ,
सोचती है ,
कही चोट का निशा ना बन जाए ,
विवाह की संभावनाए ना
घट जाए ।
लड़की किसी से नही लडती
जानती है ,
पराजय पर उसका ही एकाधिकार
है ।
इस पुरूषवादी समाज में हर तरफ
उसकी ही हार है ।
झूलती है वह सुख, दुख
के झूले में ,
बचाती है संस्कार, मूल्य ,अस्मिता
डरती है एक दिन वह खुद
बेटी को जन्म ना दे ,
उसे बचाने के चक्कर में
गिरने से ,
अपनी मर्यादा ना खो दे ।
समझाती है माँ बेटी को
ना समझ खुद को कमजोर,
एक कोशिश पुनः कर पुरजोर
संसार अवश्य चूमेगा तेरे कदम
आगे बढ़ ,
है तुझमे दम।
- केशव जांगिड ( कवि और पत्रकार )
(बाल साहित्य बाल क्लब से सम्मानित -२००८ )
कविता - बेटी

बाबुल की आन और शान है बेटी ,
इस धरा पर मालिक का वरदान
है बेटी ,
जीवन यदि संगीत है तो सरगम
है बेटी ,
रिश्तो के कानन में भटके इन्सान
की मधुबन सी मुस्कान है बेटी,
जनक की फूलवारी में कभी प्रीत
की क्यारी में ,
रंग और सुगंध का महका गुलबाग
है बेटी ,
त्याग और स्नेह की सूरत है ,
दया और रिश्तो की मूरत है
बेटी ,
कण - कण है कोमल सुंदर
अनूप है बेटी ,
ह्रदय की लकीरो का सच्चा
रूप है बेटी ,
अनुनय , विनय , अनुराग
है बेटी ,
इस वसुधा और रीत और प्रीत
का राग है बेटी ,
माता - पिता के मन का
वंदन है बेटी ,
भाई के ललाट का चंदन
है बेटी ।
- केशव जांगिड(कवि और लेखक )
(बाल साहित्य बाल क्लब से सम्मानित -२००८ )
बचालो हिन्दी को ?

हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी अस्तित्व खोती जा रही है ,लोग तेजी से हिन्दी को भूल कर इंग्लिश के वशीभूत हो गए है , आए एक प्रयास करे ,हिन्दी बचाओ अभियान में हिस्सा ले , अपनी पोस्ट हिन्दी में पोस्ट करे , केशव जांगिड (लेखक और पत्रकार) के सदसंकल्पों से एक ब्लॉग का सूत्रपात किया गया है । फसबूक लिंक से जुड़े ब्लॉग हेतु '' केशवजांगिड@ जीमेल.कॉम '' पर साहित्यिक रचनाए पोस्ट कर मोहिम में साथ दे .... बालसाहित्य बालक्लब
जागरण गीत

लिया तिरंगा हाथो में ,
अपना लहू बहा कर ,
भारत को आजाद कराया,
अपना शीश कटाकर ।
खुदीराम चढ़ा सूली पर ,
बिस्मिल ने फांसी पाई ,
भगत सिंह ने क़ुरबानी दी ,
लाला ने लाठी खायी ।
गाँधी जी ने किया आहवान ,
विदेशी होली जलाई,
पंचशील अपना कर नेहरू ने ,
भारत को नई रहा दिखाई।
था वो सागरमल गोपा ,
अग्नि पथ शहीदी पाई ,
थी रानी मर्दानी वो ,
जिससे गोरो ने मुंहकी खाई ।
मंगल ने विद्ध्रोह फूंका,
सावरकर ने चेतना जगाई ,
इन्ही सत्याग्रहों से हमने ,
मातृभूमि आजाद कराई ।
हुए साठ उन को ,
गाथाये जो वीरो ने बनाई ,
सोचो जरा अपने मन में ,
क्या सच्ची आजादी हमने पाई ।
कभी आतंकी सांसद पर ,
कभी स्वाभिमान पर वार करे ,
जयपुर , दिल्ली , बंगलुरु में
जनता हाहाकार करे ।
कश्मीरी माता बहनों से ,
आतंकी खिलवाड़ करे ,
ऐसा नृशंस तांडव देख ,
भारत माँ चीत्कार करे ।
कभी हमारी सीमाओं पर ,
शत्रु दो से चार बने ,
ऐसे में हम जगतगुरु ,
क्यो ना प्रतिकार करे ।
उत्तर ,दक्षिण , पूरब ,पश्चिम ,
बारूदों से दहले है ,
भारत माँ के वीर सपूतो ,
अब हम नहले पर दहले है ।
भारत माँ की रक्षा में ,
अर्पित करे शोर्य , तरुणाई ,
दुष्टो का करे दमन हम ,
ले विजय की अंगडाई ।
लोहपुरूष से बने हम ,
गाँधी से बने आहिंसावादी,
काम , क्रोध , वासनाए त्यागे ,
पहने हम स्वदेशी खादी ।
सदा -सर्वदा करे अंत,
भ्रष्टाचारी दानव का हम ,
शान्ति के अणु परमाणु बन ,
दीन - दुखियों के बने मरहम ।
बुराईया अब भारत छोड़ो ,
आओ युवाओ भारत जोड़ो ,
सत्य , संकल्प , सेवा ,सहयोग ,
तत्वों से भारत को जोड़ो ।
देशप्रेम की खातिर प्यारो ,
दुश्मन से तुम लड़ जाओ ,
मातृभूमि की रक्षा में ,
मस्तक अमर कर जाओ ।
तभी हमारी यह वसुधा ,
कर्मभूमि बलवान बनेगी ,
भारत भाग्य विधाता होगा ,
दुनिया हमें नमन करगी ।
केशव जांगिड (कवि और पत्रकार )
(बाल साहित्य बाल क्लब से पुरुस्कृत -2008)
रविवार, २२ नवम्बर २००९
एक संदेश
बुधवार, १८ नवम्बर २००९
कैसी विडंबना ?
आज एक तरफ तो देश गरीबी और विदेशी ताकतों से लड़ रहा है, और राज ठाकरे जैसे लोग देश के टुकड़े करने में लगे है । मराठी मानुष के नाम पर अलगाव पैदा कर रहा है । आज केन्द्र सरकार क्यो चुप है , एक उग्र साम्प्रेदायिक तत्व संविधान का मजाक बना कर खुलेआम हिंसा पर आमादा है , महारास्ट्र में कांग्रेस केवेल मूक दर्शक बनकर राजनितिक रोटिया सेक रही है , दूसरी तारफ देश की सुरक्षा के लिए चीन , पाकिस्तान से लोहा लेने में वा वाही बटोरने में लगी हुई है । सबसे पहले देश बचा ले , तब बाहर वालो की चिंता करंगे । कौन समझाये हमारी लोकतान्त्रिक सरकार ......
-- केशव जांगिड ( लेखक और पत्रकार )
-- केशव जांगिड ( लेखक और पत्रकार )
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